उर्दू जबान ब्रजभाषा से निकली है। - मुहम्मद हुसैन 'आजाद'।

Find Us On:

English Hindi
Loading

सबको लड़ने ही पड़े : दोहे  (काव्य)

Click To download this content 

Author: ज़हीर कुरैशी

बहुत बुरों के बीच से, करना पड़ा चुनाव ।
अच्छे लोगों का हुआ, इतना अधिक अभाव ।।


कहते हैं कुछ और वो, करते हैं कुछ और ।
ऐसे जन नायक बने, जनता के सिर मोर ।।


भरी जवानी में हुए घर को छोड़, फ़कीर ।
मरते दम तक भी उन्हें, चुभे मोह के तीर।।


घावों पर रखने लगे, शुद्ध नमक का प्यार
कलयुग में इतने बढ़े, मित्रों के अधिकार ।।


सबको लड़ने ही पड़े, अपने-अपने युद्ध ।
चाहे राजाराम हो, चाहे गौतम बुद्ध ।।


- ज़हीर कुरैशी


[ शोध दिशा 1994]

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश