हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

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बदला हुआ मौसम  (कथा-कहानी)

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Author: रोहित कुमार 'हैप्पी'

अचानक हिंदी पर गोष्ठियां, सम्मेलन व तरह-तरह के समारोह आयोजित होने लगे थे।  हिंदी नारे बुलंदियो पर थे। सरकारी संगठनो से साठ-गांठ के ताबड़तोड़ प्रयास भी जोरों पर थे।


इन दिनों 'अंग्रेज़ी' भी 'हिंदी' बोलने लगी थी। मौसम बदला-बदला महसूस हो रहा था। कुछ बरसों में ऐसा मौसम तब आता है जब 'विश्व हिंदी' सम्मेलन आने वाला होता है।


- रोहित कुमार 'हैप्पी'


 


 

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