अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

Find Us On:

English Hindi
Loading

चन्द्रशेखर आज़ाद की पसंदीदा शायरी (विविध)

Author: भारत-दर्शन संकलन

पं० चंद्रशेखर आज़ाद को गाना गाने या सुनने का शौक नहीं था लेकिन फिर भी वे कभी-कभी कुछ शेर कहा करते थे। उनके साथियों ने निम्न शेर अज़ाद के मुंह से कई बार सुने थे:

 

"टूटी हुई बोतल है टूटा हुआ पैमाना।
सरकार तुझे दिखा देंगे ठाठ फकीराना॥"

#

"शहीदों की चिताओं पर पड़ेंगे ख़ाक के ढेले।
वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा॥"

चंद्रशेखर आज़ाद ने शायद देश के हालातों से क्षुब्ध होकर इस शेर के शब्द बदल दिए होंगे। चंद्रशेखर दलगत राजनीति व घर के भेदियों से क्षुब्ध थे।  शेर में पहली पंक्ति मूल रूप से इस प्रकार है - 'शहीदों की मज़ारों पर लगेंगे हर बरस मेले'।

#

"दुश्मन की गोलियों का, हम सामना करेंगे।
आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही मरेंगे॥


संकलन: रोहित कुमार  

 

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश