वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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अनुपम भाषा है हिन्दी (काव्य)

Author: श्रीनिवास

अनुपम भाषा है हिन्दी
बढती आशा है हिन्दी !

स्वर की सुविधा है हिन्दी
गीतों की सुधा है हिन्दी
कवि की कविता है हिन्दी
रस की सरिता है हिन्दी !

जीवन की सुषमा है हिन्दी
यौवन-प्रतिमा है हिन्दी
गुण की सफलता है हिन्दी
मन की सरलता है हिन्दी !

रीत की प्रथा है हिन्दी
प्रीत की कथा हैं हिन्दी
छंद की घटा है हिन्दी
हिन्द की छटा है हिन्दी !

- श्रीनिवास

 

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