अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

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धन्वन्तरि - धनतेरस की पौराणिक कथा (विविध)

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Author: भारत-दर्शन संकलन

धार्मिक व पौराणिक मान्यता है साथ सागर मंथन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश के साथ अवतरित हुए थे। उनके कलश लेकर प्रकट होने की घटना के प्रतीक स्वरूप ही  बर्तन खरीदने की परम्परा का प्रचलन हुआ। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन धन (चल या अचल संपत्ति) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। धन तेरस के दिन  ग्रामीण धनिये के बीज भी खरीदते हैं। 

दीवाली के बाद इन बीजों को वे अपने खेतों में बो देते हैं। 

देश के कुछ ग्रामीण इलाकों में इस दिन लोग अपने पशुओं की पूजा करते हैं। इसके पीछे वजह यह है कि पशुओं को वे अपनी आजीविका चलाने का सबसे महत्वपूर्ण साधन मानते हैं।

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