वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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यदि मैं तानाशाह होता  (विविध)

Author: महात्मा गांधी

यदि मैं तानाशाह होता........

  • तो आज ही विदेशी भाषा में शिक्षा का दिया जाना बंद कर देता।
  • सारे अध्यापकों को स्वदेशी भाषाएँ अपनाने को मजबूर कर देता।
  • जो आनाकानी करते, उन्हें बर्ख़ास्त कर देता।
  • मैं पाठ्य पुस्तकों के तैयार किए जाने का इन्तजार न करता।

          साभार - यंग इंडिया (हिंदी आंदोलन)

 

 

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