वही भाषा जीवित और जाग्रत रह सकती है जो जनता का ठीक-ठीक प्रतिनिधित्व कर सके। - पीर मुहम्मद मूनिस।

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ख़ुदा पर है यक़ीं जिसको | ग़ज़ल (काव्य)

Author: निज़ाम फतेहपुरी

ख़ुदा पर है यक़ीं जिसको कभी दुख मे नहीं रोता
वही बढ़ता है आगे जो जवानी भर नहीं सोता

नहाए कितना भी गीदड़ वो गीदड़ ही रहेगा बस
चमक रहती है जब की शेर अपना मुँह नहीं धोता

सफ़ेदी पर न जा मेरी अभी ताकत पुरानी है
बुढ़ापे में किसी का दिल कभी बूढ़ा नहीं होता

पड़ी हो आग पर गर राख तो बस दूर ही रहना
कि अंगारा कभी अपनी तपिश जल्दी नहीं खोता

"निज़ाम" ऐसा करो कुछ काम दुनिया नाम ले तेरा
वही शायर है अच्छा जो कभी नफ़रत नहीं बोता

निज़ाम फतेहपुरी
ग्राम व पोस्ट मदोकीपुर
ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
6394332921
9198120525

ई-मेल: babukhan3716@gmail.com

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