हिंदुस्तान की भाषा हिंदी है और उसका दृश्यरूप या उसकी लिपि सर्वगुणकारी नागरी ही है। - गोपाललाल खत्री।

Find Us On:

English Hindi
Loading

खोया हुआ सा बचपन (काव्य)

Author: माधुरी शर्मा ' मधु'

बच्चे तो हैं, पर बचपन कहाँ हैं?
वो मासूमियत, वो रौनक कहाँ हैं?
वो खेल, वो खिलौने कहाँ हैं?
वो मस्ती और वो मौज कहाँ हैं?
उलझ सा गया है बचपन.....

उठ कर पढ़ना, पढ़ कर सोना,
किताबों की दुनिया मे हर वक़्त खोना
वो नज़र, वो प्यार कहाँ हैं?
वो आँसू, वो मुस्कान कहाँ हैं?
बिखर सा गया है बचपन.......

कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी चलाना
इन्हीं के खेलों में खो जाना,
वो रूठना, वो मनाना कहाँ हैं?
हर शाम का वो अफसाना कहाँ है?
सिमट सा गया है बचपन......

वो बारिश में भीगना
वो मिट्टी में खेलना,
वो पड़ोस के हर घर में
अपनी हँसी बिखेरना,
अब वो मंज़र, वो बात कहां हैं?
वो नन्हें कदमों की आवाज कहाँ है?
अब तो बस एक होड़ लगी है
सबसे आगे निकलने की,
इस दौर में
इस दौड़ में
खो सा गया है बचपन.......

माधुरी शर्मा ' मधु'
व्याख्याता हिंदी
भीलवाड़ा राजस्थान
ई-मेल: madhuri.sharmaxyz@gmail.com

 

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश