भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

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गोरख पांडे की दो कविताएं  (काव्य)

Author: गोरख पांडे

तंत्र

राजा बोला रात है,
रानी बोली रात है,
मंत्री बोला रात है,
संतरी बोला रात है,
--यह सुबह-सुबह की
बात है।

-गोरख पांडे


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सच्चाई

मेहनत से मिलती है
छिपाई जाती है स्वार्थ से
फिर, मेहनत से मिलती है

-गोरख पांडे

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