परमात्मा से प्रार्थना है कि हिंदी का मार्ग निष्कंटक करें। - हरगोविंद सिंह।

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झूठों ने झूठों से... (काव्य)

Author: राहत इन्दौरी

झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी ऐलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर झूठों की एक मंडी है
दरवाजे पर लिखा हुआ है सच बोलो

गुलदस्ते पर यकजहती* लिख रखा है
गुलदस्ते के अंदर क्या है सच बोलो

गंगा मैया डूबने वाले अपने थे
नाव में किसने छेद किया है सच बोलो


- राहत इन्दौरी


*यकजहती = एकता

 

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