हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया। - राजेंद्रप्रसाद।

Find Us On:

English Hindi
Loading

पानी का रंग (काव्य)

Author: सुखबीर सिंह

पानी के रंग जैसी हैं ये जिंदगी,
इसे जैसे बनाओगे वैसे ही बन जाएगी।

अगर इरादे मजबूत हों तो
आसमान भी छुना मुश्किल नहीं।
अगर हम ही कमजोर हों तो
ये जिंदगी भी हार मान जाएगी।

पानी के रंग जैसी हैं ये जिंदगी
इसे जैसे बनाओगे वैसे ही बन जाएगी।

किस्मत पे यकीन करना तू छोड़ दे
बस अपने कर्म करने पर जोर दे।
हर एक पल बड़ा कीमती हैं, दोस्त
बीती घड़ी दोबारा हाथ नहीं आएगी।

पानी के रंग जैसी हैं ये जिंदगी
इसे जैसे बनाओगे वैसे ही बन जाएगी।

हाथ की लकीरों को
देखने से कुछ नहीं होगा।
दुनिया में वे लोग भी होते हैं
जिनके हाथ नहीं होते।

चलते रहो अपने मुकाम की ओर
सफलता एक दिन जरूर हाथ आएगी।

पानी के रंग जैसी हैं ये जिंदगी
इसे जैसे बनाओगे वैसे ही बन जाएगी।

- सुखबीर सिंह
ई-मेल: sukhbir052@gmail.com

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश