किसी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता। - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।

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कविता-कविता (काव्य)

Author: कौतुक बनारसी | हास्य कविता

कुछ जीत हुई, कुछ हार हुई
              दिन-रात रटें कविता-कविता
कुछ आन रही, कुछ शान रही
             हर बात रटें कविता-कविता
हर मौसिम में सरदी गरमी
             बरसात, रटें कविता-कविता
उफ, जात रहे न रहे जग में,
              कमजात रटें कविता-कविता

- कौतुक बनारसी

 

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