देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

Find Us On:

English Hindi
Loading

ख़ाक (काव्य)

Author: अमर मंडल

था मैं भी पेड़,
अब हूँ धरा में पड़ा सा,
अब धूल हो जाऊंगा,
धूल मे पड़ा-पड़ा,
सहा था सूरज की तपन,
अब हल्की चिंगारी राख़ सा कर जाएगी,
ख़ाक ने जना था मुझे,
अब ख़ाक ख़ाक सा कर जाएगी।

- अमर मंडल
amarmandal250@gmail.com

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश