भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

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लायक बच्चे (कथा-कहानी)

Author: रोहित कुमार 'हैप्पी'

अकेली माँ ने उन पांच बच्चों की परवरिश करके उन्हें लायक बनाया। पांचों अपने पाँवों पर खड़े थे।

उनको खड़ा करते-करते माँ बैठ गई थी पर उसे खड़ा करने को कोई नहीं था। माँ ने एक-आध नालायक़ पैदा किया होता तो शायद आज साथ होता पर लायक बच्चे तो बहुत व्यस्त हो चुके थे।

रोहित कुमार 'हैप्पी'
न्यूज़ीलैंड।

 

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