अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

Find Us On:

English Hindi

मौत की रेल (काव्य)

Author: डॉ॰ चित्रा राठौड़

ज़िन्दगी की पटरियों पर से मौत की रेल गुज़र गई
‌भूख और मजबूरी कुछ और बदनसीबों को निगल गई।
जहॉं कुछ देर पहले तक शोर था आस भरी बातों का
अब वहीं पर मरघट सी मनहूसियत पसर गई।
रोटी-सब्ज़ी और सामान बिखर गया पटरियों पर
इंसानी देह लेकिन पोटलियों में सिमट गई।
कोरोना महामारी का तो फ़कत बहाना रहा
हक़ीक़त में रोज़ी-रोटी की फिक्र ही इन गरीबों को निगल गई।
ज़िन्दगी की पटरियों पर से मौत की रेल गुज़र गई
‌भूख औ' मजबूरी कुछ और बदनसीबों को निगल गई।

डॉ॰ चित्रा राठौड़
एसोसियेट प्रोफ़ेसर
ई-मेल: rathorechitra3@gmail.com

 

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश