समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

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मोबाइल में गुम बचपन  (काव्य)

Author: डॉ दीपिका

सच ही तो है,
मोबाइल ने गुमाया बचपन।
क्या खूब थी, वो सुबह
सूर्य की लालिमा और दूर तलक बच्चों की सभा।
क्या खूब थी पेड़ो की छाँव,
जब पर्चियों के खेल थे
गली में बच्चों के भी मेल थे।
क्या खूब थी वो शाम,
पिठू, बैटबॉल, बैडमिंटन के नाम।
सब लुप्त कर दिया
इस मोबाइल ने,
ले लिया बचपन
अपने 'स्टाइल' में।

--डॉ दीपिका
ई-मेल: deep2581@yahoo.com

 

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