इस विशाल प्रदेश के हर भाग में शिक्षित-अशिक्षित, नागरिक और ग्रामीण सभी हिंदी को समझते हैं। - राहुल सांकृत्यायन।

Find Us On:

English Hindi

हिन्दी-हत्या (काव्य)

Author: अरुण जैमिनी

सरकारी कार्यालय में
नौकरी मांगने पहुँचा
तो अधिकारी ने पूछा-
"क्या किया है?"

मैंने कहा- "एम.ए."

वो बोला- "किस में?"

मैंने गर्व से कहा- "हिन्दी में।"

उसने नाक सिकोंड़ी
"अच्छा... हिन्दी में एम.ए. हो!
बड़े बेशर्म हो
अभी तक ज़िन्दा हो!
तुमसे तो
वो स्कूल का लड़का ही अच्छा था
जो ज़रा-सी हिन्दी बोलने के कारण
इतना अपमानित हुआ
कि उसने आत्म-हत्या कर ली,
अरे!
इस देश के बारे में कुछ सोचो
नौकरी मांगने आए हो,
जाओ भैया!
कहीं कुआँ या खाई खोजो।"

मैंने कहा-
"हिन्दुस्तान में रहते
हिन्दी का विरोध
हिन्दी के प्रति
इतना प्रतिशोध?"

वो बोला-
"यह हिन्दुस्तान नहीं
इंडिया है,
और हिन्दी
सुहागिन भारत के माथे की
उजड़ी हुई बिन्दिया है।
तुम्हारे ये हिन्दी के ठेकेदार
हर वर्ष
हिन्दी-दिवस तो मनाते हैं
पर रोज़ होती हिन्दी-हत्या को
जल्दी भूल जाते हैं।"

--अरुण जैमिनी

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश