कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

Find Us On:

English Hindi

शादी मत करना (काव्य)

Author: गौरीशंकर 'मधुकर'

अफसर ने अफसरी
छांटते हुए
ऑफिस के क्लर्क
को डांटते हुए कहा- बहुत हो गया
कितनी छुट्टियां
ले चुके हो?
दो बार विदाउट
पे हो चुके हो
कभी ससुराल जाना
कभी बच्चे को
स्कूल में भर्ती कराना
कभी मां बीमार
कभी साले की सगाई
कभी साली की गोद-भराई
न जाने कैसे-कैसे बहाने बनाते हो!
महीने में पंद्रह  दिन
ऑफिस आते हो
क्लर्क को
कोई फर्क नहीं पड़ा
बेशर्मी से
मुस्कुराकर बोल पड़ा
सर! एक बार
और छुट्टी दे दीजिए
आप तो दयालु हैं
कृपा कीजिए
आगे से
छुट्टी पर नहीं जाऊंगा
दरअसल सरकारी
नौकरी वालों को
शादी जल्दी हो जाती है
यहां आपका हुक्म चलता है
वो घर पर चलाती है 
यहां आपके अंडर में रहता हूं
वहां उसके अंडर में रहता है
इसलिए तो
मैं कुंवारों से कहता हूं
अपने हाथों
अपनी जिंदगी
तबाह मत करना
कोई कितना भी
लालच क्यों ना दे मगर
भूलकर भी जा
तुम शादी मत करना। 

- गौरीशंकर 'मधुकर'
[हास्य-व्यंग्य काव्य-संग्रह]

 

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश