हमारी हिंदी भाषा का साहित्य किसी भी दूसरी भारतीय भाषा से किसी अंश से कम नहीं है। - (रायबहादुर) रामरणविजय सिंह।

Find Us On:

English Hindi
Loading
नीति के दोहे (काव्य) 
Click to print this content  
Author:कबीर, तुलसी व रहीम

कबीर के नीति दोहे

साई इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय ।
मैं भी भूखा ना रहूँ साधु न भूखा जाय ॥


जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान ।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान ॥


निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय ।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय ॥

- कबीरदास

 

 

तुलसीदास के नीति दोहे


मुखिया मुख सौं चाहिए, खान-पान को एक ।
पालै पोसै सकल अंग, तुलसी सहित विवेक |

आवत ही हर्ष नहीं, नैनन नहीं सनेह ।
तुलसी तहाँ न जाइए, कंचन बरसे मेह ।

तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर ।
बसीकरन इक मंत्र है, तज दे बचन कठोर II

- तुलसीदास

 

रहीम के नीति दोहे


तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहिं न पान |
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहिं सुजान ।

रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय |
सुनि इटलैहैं लोग सब, बाँट न लैहैं कोय ।

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग ।
चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग ।

- रहीम

 

Previous Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.