हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

Find Us On:

English Hindi
Loading
नेता जी सुभाषचन्द्र बोस (विविध) 
Click To download this content    
Author:डॉ० राणा प्रताप गन्नौरी राणा

वह इस युग का वीर शिवा था,
आज़ादी का मतवाला था।

जन-मन पर शासन था उसका,
दृढ़ तन कोमल मन था उसका।

शासन की मुट्ठी से निकला,
और कभी फिर हाथ ना आया।

शासन के सब यत्न विफ़ल कर,
साफ़ गया वह वीर निकल कर।

वह अफ़गानिस्तान गया था,
जर्मनी औ' जापान गया था।

एकाकी था, सेना लाया,
और विजेता बनकर आया।

काँप उठी थी गोरा-शाही,
नाच उठी चहुँ ओर तबाही।

वह सचमुच का ही नेता था,
रक्त ले आज़ादी देता था।

प्रतिपल ख़तरों ही में रहना,
उसके साहस का क्या कहना।

आशा को थी आशा उस से,
और निराश निराशा उस से।

इम्फल तक वह आ पहुँचा था,
लक्ष्य को सम्मुख देख रहा था।

हा! लकिन दुर्भाग्य हमारा,
छिपा उदय होते ही तारा।

रण का पाँसा पलट गया था,
बिगड़ गया जो काम बना था।

अभी हमें संकट सहना था,
पर-अधीन अभी रहना था।

वाहन लेकर वायुयान का,
और छोड़ कर मोह प्राण का।

चला गया वह समर-भूमि से,
निज भारत की अमर भूमि से।

कौन कहे फिर कहाँ गया वह,
हुआ वहीं का जहाँ गया वह।

-डॉ. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

 

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश