कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

Find Us On:

English Hindi
Loading
दूरदर्शिता | सुभाष चन्द्र बोस  (विविध) 
Click to print this content  
Author:सुखबीर

भारत की आज़ादी के लिए ‘आज़ाद हिन्द फौज' का संगठन बहुत अच्छा बन गया था और वह बड़े हौसले से काम कर रही थी। अकस्मात एक दिन साम्प्रदायिक विद्वेष भड़क उठा। हिन्दुओं का कहना था कि रसोई में गाय का मांस नहीं बनेगा। दूसरी ओर मुसलमानों का आग्रह था कि सूअर का मांस नहीं बनेगा।

दोनों की अपनी-अपनी भावना थी, अपने-अपने तर्क थे। कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं था।

विवाद ने उग्र रुप धारण कर लिया। समझौता असंभव हो गया तो बात नेताजी तक पहुंची।

नेताजी ने दोनों पक्षों की बात बड़े ध्यान से सुनी। उनकी भावना को गहराई से समझा और अगले दिन निर्णय देने को कहा। चूंकि वह आज़ाद हिन्द फौज के शीर्ष स्थान पर थे, अत: उनका निर्णय अंतिम था।

अगला दिन आया। नेताजी का निर्णय जानने के लिए लोगों की उत्सुकता चरम सीमा पर थी।

नेताजी ने जो निर्णय दिया, उसकी स्वप्न में भी किसी ने कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा, "आगे से हमारे मैस में न गाय का मांस पकेगा, न सूअर का।"

नेताजी की दूरदर्शिता से एक बहुत बड़ा संकट टल गया और दोनों पक्ष संतुष्ट हो गये।

- सुखबीर

[साभार - बड़ों की बड़ी बातें, सस्ता साहित्य मंडल]

 

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश