क्या संसार में कहीं का भी आप एक दृष्टांत उद्धृत कर सकते हैं जहाँ बालकों की शिक्षा विदेशी भाषाओं द्वारा होती हो। - डॉ. श्यामसुंदर दास।

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ट्रेडमी विज्ञापन विवाद  (विविध) 
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Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

पिछले दिनों न्यूजीलैंड के सबसे बड़े ऑनलाइन पोर्टल ‘ट्रेडमी' में प्रकाशित 'फ्लैटमेट चाहिए'  का एक विज्ञापन विवादों में घिर गया। इसमें कहा गया था कि भारतीय या एशियाई फ्लैटमेट स्वीकार्य नहीं। इसको लेकर यहां के भारतीय समुदाय में काफी आक्रोश पैदा हो गया।

क्राइसचर्च शहर के रहने वाले एक व्यक्ति ने एक सप्ताह पहले यह विज्ञापन पोस्ट किया था। इस विज्ञापन को सैकड़ों लोगों ने देखा।

विवाद खड़ा होने के बाद इस व्यक्ति ने विज्ञापन हटा लिया है। विज्ञापनदाता का कहना है कि वह नस्लभेदी नहीं है, लेकिन वह ऐसे लोगों के साथ नहीं रहना चाहता जो हर रात करी बनाएं या फिर अच्छी तरह अंग्रेजी ना बोल सके।

'मेरा ईमानदार जवाब यह है कि इनमें से ज्यादातर लोग अच्छी तरह अंग्रेजी नहीं बोल पाते और अतीत में भी संवाद को लेकर मेरी समस्या रही है। कई बार मैंने उनको समझाया कि वे गलत कर रहे हैं लेकिन वो नहीं समझ पाए।' इस विज्ञापन को लेकर भारतीय समुदाय के लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

‘न्यूजीलैंड इंडियन सेंट्रल एसोसिएशन' के अध्यक्ष हषर्दभाई पटेल ने कहा, 'इस विज्ञापन के बारे में सुनकर हैरानी हुई है। यह ठीक नहीं है। हमें ऐसे विज्ञापनों को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। लोग जिसके साथ रहना चाहे रह सकते हैं, लेकिन इस तरह का भेदभाव चिंताजनक है।'

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