नागरी प्रचार देश उन्नति का द्वार है। - गोपाललाल खत्री।

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विश्वनाथ प्रताप सिंह की दो क्षणिकाएँ  (काव्य) 
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Author:विश्वनाथ प्रतापसिंह

लिफाफा

पैगाम तुम्हारा
और पता उनका
दोनों के बीच
फाड़ा मैं ही जाऊँगा।

- विश्वनाथ प्रतापसिंह

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झाड़न

पड़ा रहने दो मुझे
झटको मत
धूल बटोर रखी है
वह भी उड़ जाएगी।

- विश्वनाथ प्रतापसिंह

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