वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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हो हो होली (बाल-साहित्य ) 
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Author:होलिका नन्द

हो हो होली
कैसी होली आई, धूल है खूब उड़ाई ;
कैसी होली---

पत्ते सूख सूख कर गिरते, भागी सर्दी माई,
सौड़ लिहाफ़ सुहाता किसको, धूप कड़ी है भाई,
हवा में गर्मी आई।
कैसी होली---

भूख हुई कम, प्यास बढ़ी है, है चाँदनी सुहाई,
लड़के लड़की होली खेलें, अच्छी धूम मचाई।
रंग पिचकारी पाई ।
कैसी होली---

--होलिका नन्द
[बालसखा, 1917]

 

 

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