किसी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता। - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।

Find Us On:

English Hindi
Loading
डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश  (विविध) 
Click to print this content  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

30 जनवरी 2019: करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (Corruption Perceptions Index) 2018 के अनुसार 180 देशों की सूची में डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश है। इस सूची में डेनमार्क ने 100 में से सर्वाधिक 88 अंक लेकर पहला स्थान पाया है। डेनमार्क इस सूची में पिछले कई वर्षों से लगातार शीर्ष पर है। सबसे कम भ्रष्ट देशों की सूची में डेनमार्क (88) के बाद न्यूजीलैंड 87 अंक लेकर द्वितीय और फिनलैंड, सिंगापुर, स्वीडन व स्विट्ज़रलैंड 85 अंक लेकर तीसरे स्थान पर हैं।

न्यूजीलैंड का पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया 77 अंकों के साथ 13वें स्थान पर है।

भारत थाईलैंड, ब्राजील, ट्यूनीशिया, जांबिया और बुर्किनाफासो के साथ 76वें स्थान पर है। भारत ने 100 में से 38 अंक अर्जित किए हैं।

भारत इस सूची में 41 अंकों के साथ 78 वें स्थान पर है। पिछली बार भारत 81वें स्थान पर था। इस बार उसका 78वां स्थान पाने से स्थिति नि:संदेह सुधरी है लेकिन इसे बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं कहा जा सकता।

भारत के पड़ोसी देशों में भूटान 68 अंकों के साथ 25वें स्थान पर है और भारत से आगे है। वहीं चीन 39 अंकों के साथ 87वें और श्रीलंका 38 अंकों के साथ 89वें, पाकिस्तान 33 अंकों के साथ 117वें, नेपाल 31 अंको के साथ 124वें और बांग्लादेश 26 अंक लेकर 149वें स्थान पर है।

भारतीय जनसंख्या वाले मॉरीशस 51 अंकों के साथ 56वें व त्रिनिदाद-टोबेगो 41 अंकों के साथ 78वें स्थान पर हैं। फ़ीजी इस सूची में सम्मिलित नहीं है।

सोमालिया दस अंको के साथ सबसे निचले पायदान पर है यानी सर्वाधिक भ्रष्ट देश गिना गया है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार इस बार का सर्वेक्षण 180 देशों पर आधारित है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक पहली बार 1995 में जारी किए गए थे जब ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के गठन को अभी दो वर्ष हुए थे।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश