जो साहित्य केवल स्वप्नलोक की ओर ले जाये, वास्तविक जीवन को उपकृत करने में असमर्थ हो, वह नितांत महत्वहीन है। - (डॉ.) काशीप्रसाद जायसवाल।

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इस दुनिया के रंग निराले (काव्य) 
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Author:रोहित कुमार हैप्पी

इस दुनिया के रंग निराले
मुँह के मीठे दिल के काले।

यूं तो हरदम हाथ मिलावें
पीठ पे मारें छुरी-भाले।

पत्थर हीरा, हीरा पत्थर
तेरी आँखों में हैं जाले।

जब भी हाथ मिलाए जालिम
हाथों में पड़ ज़ाए छाले।

करना पडता है कुरूक्षेत्र
युद्ध नहीं जब टलता टाले।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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