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सूरीनाम में प्रवासी दिवस व विश्व हिंदी-दिवस (विविध) 
   
Author:कविता मालवीय

सूरीनाम: भारतीय सांस्कृतिक केंद्र और भारतीय राजदूतावास पारामारिबो द्वारा प्रवासी भारतीय दिवस और विश्व हिंदी दिवस 8 जनवरी 2016 को मनाया गया।  विचार गोष्ठी कार्यक्रम के विषय, 'सूरीनाम के हिन्दुस्तानियों में हिंदी भाषा की भूमिका' पर सूरीनाम के प्रतिष्ठित हिंदी वक्ताओं के द्वारा दिए गए भाषणों व 'आई सी सी' के हिंदी विद्यार्थियों द्वारा हिंदी की विभिन्न विधाओं पर संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम की शोभा में चार चांद लगा दिए।

कार्यक्रम का आरम्भ सूरीनाम में भारत के राजदूत महामहिम श्री सत्येंदर कुमार के स्वागत भाषण से हुआ जिसमें उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी का सन्देश पढ़ा और सूरीनाम की धरती पर धड़कते भारत के हिन्दुतानियों की भाषा के प्रति लगन की भूरि भूरि प्रशंसा की। हिंदी और भारतीय संस्कृति के क्षेत्र में सतत् सहयोग का उल्लेख किया।

मंच पर आये वक्ताओं में विशेष अतिथि कविवर सुरजन परोही, सांसद सदस्य डॉक्टर देव शर्मा, सूरीनाम हिंदी परिषद के सभापति भोलानाथ नारायण और प्रथम महिला भूतपूर्व संसद सदस्या इंदिरा ज्वालाप्रसाद ने जहाँ अपने विचारो के प्रवाह में दर्शकों को बाँध लिया, वहीँ आप्रवासी हिन्दुस्तानियों में हिंदी में आगे बढ़ने की और ललक जगाई। कार्यक्रम की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 'आई. सी. सी' के हिंदी विद्यार्थियों ने हिंदी साहित्य की विविध विधाओं यथा कविता, कहानी और श्लोक वाचन प्रस्तुत किया। संगीत बद्ध रचनाओं  'यह है सूरीनाम हमारा' और 'ध्वन ध्वन ध्वनित हो रहा है' को गाकर संगीत के विद्यार्थियों ने संगीत की छटा बिखेरी।


तत्पश्चात भारत के राजदूत ने सुरजन परोही को विश्व हिंदी सम्मलेन में मिले विश्व हिंदी सम्मान की बधाई देकर शाल उढ़ाया। युवा दल के सभापति के द्वारा हिंदी पर अपनी चर्चित स्वरचित कविता सुनाने के बाद नृत्य के विद्यार्थियों ने 'हिंदी देश की बिंदी गीत' पर झंकार नृत्य प्रस्तुत किया।

समापन के क्षणों में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक रंजीत अरोरा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। 'आई सी सी' की हिंदी अध्यापिका कविता मालवीय ने हिंदी साहित्य की कविताओं और धड़कन कविता का परिचय दे कार्यक्रम का संचालन किया।

रिपोर्ट व छायाचित्र : कविता मालवीय


[ 'प्रवासी भारतीय दिवस' 9 जनवरी व 'विश्व हिंदी दिवस' 10 जनवरी को होता है लेकिन इस बार इन तिथियों को सप्ताहांत होने के कारण विभिन्न देशों में इस यथासंभव आयोजित किया था। ]

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