राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार।

Find Us On:

English Hindi
गिलहरी  (बाल-साहित्य ) 
   
Author:अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

कहते जिसे गिलहरी हैं सब ।
सभी निराले उसके हैं ढब


पेड़ों से नीचे है आती ।
फिर पेड़ों पर है चढ़ जाती ॥

कुतर कुुतर फल को है खाती ।
बच्चों को है दूध पिलाती


उसकी रंगत भूरी कारी ।
आँंखों को लगती है प्यारी ॥

होती है यह इतनी चंचल ।
कहीं नहीं इसको पड़ती कल ॥

उछल कूद में है यह जैसी ।
दौड
धूप में भी है वैसी ॥

बैठी इस धरती के ऊपर ।
दोनों हाथों में कुछ ले कर ।।

जब वह जल्दी से है खाती ।

तब है कैसी भली दिखाती ॥

चिकना चिकना रोआँ इसका ।

लुभा नहीं लेता जी किसका ।।

मत तुम इसको ढेले मारो
जा पूरा इतना बात बचा ॥

कहीं इसे जो लग जावेगा ।

तो इसका जी दुःख पावेगा ॥

अब तक सब ने है यह माना ।
जी का अच्छा नहीं दुखाना ॥

- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

 

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश