यदि स्वदेशाभिमान सीखना है तो मछली से जो स्वदेश (पानी) के लिये तड़प तड़प कर जान दे देती है। - सुभाषचंद्र बसु।

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नवयुग के प्रणेता (बाल-साहित्य ) 
   
Author:कोमल मेहंदीरत्ता

आज के बच्चे हम
नवयुवक के प्रणेता बनेंगे
भविष्य-रचयिता हैं हम
वर्तमान से ही शुरुआत करेंगे
अपने इस बहुभाषी देश में
हर भाषा का सम्मान करेंगे
पल-पल बढ़ते प्रदूषण का
मिल-जुलकर हम नाश करेंगे
अशिक्षा, बेरोज़गारी, महँगाई को
हम बिलकुल भी टिकने न देंगे
जात-पात और क्षेत्रवाद की बेड़ियों को
हर हाल में
हम तोड़कर ही दम लेंगे
ठान लिया लिया है अब तो हमने
नारी-सम्मान के प्रवर्तक बनेंगे
प्रण करते हैं
आज हम बच्चे
नवयुग के प्रणेता बनेंगे
गांधी, नेहरू के सपनों को पूरा करके
सतयुग का आग़ाज़ करेंगे

-कोमल मेहंदीरत्ता
ई-मेल: komal.mendiratta@nd.balbharati.org

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