विदेशी भाषा में शिक्षा होने के कारण हमारी बुद्धि भी विदेशी हो गई है। - माधवराव सप्रे।

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साखी

प्राचीन धर्म प्रवर्तकों द्वारा प्रतिपादित ज्ञान को शिष्यों के समक्ष, साक्षी रुप में उपस्थित करते समय जिस काव्यरुप का जन्म हुआ, वह साखी कहलाया।

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कबीर की ज्ञान, भक्ति और नीति साखियाँ - कबीरदास | Kabirdas

यहाँ कबीर की ज्ञान, भक्ति और नीति के विषयों से सम्बद्ध साखियाँ संकलित हैं। इनमें आत्मा की अमरता, संसार की असारता, गुरु की महिमा तथा दया, सन्तोष और विनम्रता जैसे सद्गुणों पर बल दिया गया है।
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