हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

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बोध कथाएं

बोध-कथाओं में कोई न कोई नैतिक शिक्षा अवश्य निहित रहती है और आप एक क्षण के लिए सोचने को बाध्य हो जाते हैं। यहाँ हम भारत-दर्शन के पाठकों के लिए बोध कथाएं संकलित कर रहे हैं। इन छोटी-छोटी कथा-कहानियों में परबत-सी ऊंची बातें और सागर-सी गहनता होती है निसंदेह यह कथाएं आपको पठनीय व रुचिकर लगेंगी। नैतिक सीख देती, बोध कथाओं का यह संकलन आपको भेंट।

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जीवन - संजय उवाच  - संजय भारद्वाज

भयमिश्रित एक चुटकुला सुनाता हूँ। अँधेरा हो चुका था। राह भटके किसी पथिक ने श्मशान की दीवार पर बैठे व्यक्ति से पूछा,' फलां गाँव के लिए रास्ता किस ओर से जाता है?' उस व्यक्ति ने कहा, 'मुझे क्या पता? मुझे तो गुजरे 200 साल बीत चुके।'

 

 

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