वही भाषा जीवित और जाग्रत रह सकती है जो जनता का ठीक-ठीक प्रतिनिधित्व कर सके। - पीर मुहम्मद मूनिस।

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इतिहास के पन्नों से

ऐतिहासिक तथ्यों, घटनाओं और साक्ष्यों पर आधारित आलेख, निबंध, काव्य व ऐतिहासिक कथा-कहानियों का संकलन।

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बापू का अंतिम दिन - प्यारे लाल - भारत-दर्शन संकलन | Collections

29 जनवरी को सारे दिन गांधीजी को इतना ज्यादा काम रहा कि दिन के आखिर में उन्हें खूब थकान मालूम होने लगी । काँग्रेस-विधान के मसविदे की तरफ इशारा करते हुए, जिसे तैयार करने की जिम्मेदारी उन्होंने ली थी, उन्होंने आभा से कहा, "मेरा सिर घूम रहा है। फिर भी मुझे इसे पूरा करना ही होगा। मुझे डर है कि रात को देर तक जागना होगा।"

 

 

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