किसी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता। - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।

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संपादकीय

भारत-दर्शन संपादकीय।

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देश पर मिटने वाले शहीदों की याद में - रोहित कुमार 'हैप्पी'

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ का आरम्भ किया महर्षि दयानन्द सरस्वती ने और इस यज्ञ को पहली आहुति दी मंगल पांडे ने। देखते ही देखते यह यज्ञ चारों ओर फैल गया। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्यां टोपे और नाना राव जैसे योद्धाओं ने इस स्वतंत्रता के यज्ञ में अपने रक्त की आहुति दी। दूसरे चरण में 'सरफरोशी की तमन्ना' लिए रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव आदि देश के लिए शहीद हो गए। तिलक ने 'स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' का उदघोष किया व सुभाष चन्द्र बोस ने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा' का मँत्र दिया।

 
मुंशी प्रेमचंद - कलम का सिपाही - रोहित कुमार 'हैप्पी'

प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस शहर से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। केवल तेरह वर्ष की आयु में ही प्रेमचन्द ने लिखना आरंभ कर दिया था। आरम्भ में आपने कुछ नाटक लिखे फिर बाद में उर्दू में उपन्यास लिखना आरंभ किया। इस तरह आपका साहित्यिक सफर शुरु हुआ जो जीवन भर चलता रहा। प्रेमचंद को यूं तो उपन्यास-सम्राट कहा जाता है किंतु उन्हें कहानी-सम्राट कह देना भी पूर्णतया उचित होगा। प्रेमचंद की कहानियां जितनी लोकप्रिय हैं शायद ही किसी अन्य की हों!

 

 

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