अपनी सरलता के कारण हिंदी प्रवासी भाइयों की स्वत: राष्ट्रभाषा हो गई। - भवानीदयाल संन्यासी।

Find Us On:

English Hindi
Loading

हिंदी भजन

हिंदी भजन-Hindi Bhajan

Article Under This Catagory

मोहन खेल रहे है होरी - शिवदीन राम

मोहन खेल रहे हैं होरी ।
गुवाल बाल संग रंग अनेकों, धन्य धन्य यह होरी ।।
वो गुलाल राधे ले आई, मन मोहन पर ही बरसाई ।
नन्दलाल भी लाल होगये, लाल लाल वृज गौरी ।।
गुवाल सखा सब चंग बजावे, कृष्ण संग में नांचे गावें ।
ऐसी घूम मचाई कान्हा, मस्त मनोहर जोरी ।।
नन्द महर घर रंग रंगीला, रंग रंग से होगया पीला ।
बहुत सजीली राधे रानी, वे अहिरों की छोरी ।।
शोभा देख लुभाये शिवजी, सती सायानी के है पिवजी ।
शिवदीन लखी होरी ये रंग में, रंग दई चादर मोरी ।।

 
रे रंग डारि दियो राधा पर - शिवदीन राम

रे रंग डारि दियो राधा पर, प्यारा प्रेमी कृष्ण गोपाल |
तन मन भीगा अंग-अंग भीगा, राधा हुई निहाल || रे...
गोप्या रंग रंगीली रंग में, ग्वाल सखा कान्हा के संग में |
चंग बजावे रसिया गावे, गांवें राग धमाल || रे....
श्यामा श्याम यमुन तट साजे, मधुर अनुपम बाजा बाजे |
रंग भरी पिचकारी मारे, हँसे सभी ब्रिजबाल || रे...
मोर मुकुट पीताम्बर वारा, निरखे गोप्यां रूप तिहारा |
राधा कृष्ण मनोहर जोरी, काटत जग जंजाल || रे...
शिवदीन रंगमय बादल छाया, मनमोहन प्रभू रंग रचाया |
गुण गावां, गावां गुण कृष्णा, मोहे बरषाने ले चाल || रे...

 

 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश