हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

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क्षणिकाएं

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दो क्षणिकाएं  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

कवि 

 

 

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