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बिहारी के दोहे | Bihari's Couplets

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 बिहारी | Bihari

रीति काल के कवियों में बिहारी सर्वोपरि माने जाते हैं। सतसई बिहारी की प्रमुख रचना हैं। इसमें 713 दोहे हैं। बिहारी के दोहों के संबंध में किसी ने कहा हैः

सतसइया के दोहरा ज्यों नावक के तीर।
देखन में छोटे लगैं घाव करैं गम्भीर।।

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नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास यहि काल।
अली कली में ही बिन्ध्यो आगे कौन हवाल।।

कोटि जतन कोऊ करै, परै न प्रकृतिहिं बीच।
नल बल जल ऊँचो चढ़ै, तऊ नीच को नीच।।

कब को टेरत दीन ह्वै, होत न स्याम सहाय।
तुम हूँ लागी जगत गुरु, जगनायक जग बाय।।

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बिहारी के होली दोहे
Posted By Chand   on
Very nice doha sir
Posted By shailendra Tiwari   on
वाओ क्या बात है आज के कबि तो सिर्फ अपने बारे में लिखते है हमारे साथ क्या हुआ
Posted By brij.kumar   on
थैंक्स

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