अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

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मीरा के भजन

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 मीराबाई | Meerabai

मीरा के भजनों का संग्रह।

 

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मेरो दरद न जाणै कोय
श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया
होरी खेलत हैं गिरधारी
Posted By manish Bishnoi   on
9521141229

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