इस विशाल प्रदेश के हर भाग में शिक्षित-अशिक्षित, नागरिक और ग्रामीण सभी हिंदी को समझते हैं। - राहुल सांकृत्यायन।

Find Us On:

English Hindi

ज़हर की जड़ें

 (कथा-कहानी) 
 
रचनाकार:

 बलराम अग्रवाल

दफ़्तर से लौटकर मैं अभी खाना खाने के लिए बैठा ही था कि डॉली ने रोना शुरू कर दिया।

"अरे-अरे-अरे, किसने मारा हमारी बेटी को?" उसे दुलारते हुए मैंने पूछा।

"डैडी, हमें स्कूटर चाहिए।" सुबकते हुए ही वह बोली।

"लेकिन तुम्हारे पास तो पहले ही बहुत खिलौने है!"

इस पर उसकी हिचकियाँ बँध गईं। बोली,"मेरी गुड़िया को बचा लो डैडी!"

"बात क्या है?" मैंने दुलारपूर्वक पूछा।

"पिंकी ने पहले तो अपने गुड्डे के साथ हमारी गुड़िया की शादी करके हमसे हमारी गुड़िया छीन ली..." डॉली ने जोरों से सुबकते हुए बताया,"अब कहती है-दहेज में स्कूटर दो, वरना आग लगा दूँगी गुड़िया को।...गुड़िया को बचा लो डैडी...हमें स्कूटर दिला दो।"

डॉली की सुबकियाँ धीरे-धीरे तेज होती गईं और शब्द उसकी हिचकियों में डूबते चले गए।

- बलराम अग्रवाल 

[साभार - लघुकथा.कॉम]

Back

 

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश