देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

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प्रतिनिधि निबंधों व समालोचनाओं का संकलन आलेख, लेख और निबंध.

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पांच पर्वों का प्रतीक है दीवाली - भारत-दर्शन संकलन

त्योहार या उत्सव हमारे सुख और हर्षोल्लास के प्रतीक है जो परिस्थिति के अनुसार अपने रंग-रुप और आकार में भिन्न होते हैं। त्योहार मनाने के विधि-विधान भी भिन्न हो सकते है किंतु इनका अभिप्राय आनंद प्राप्ति या किसी विशिष्ट आस्था का संरक्षण होता है। सभी त्योहारों से कोई न कोई पौराणिक कथा अवश्य जुड़ी हुई है और इन कथाओं का संबंध तर्क से न होकर अधिकतर आस्था से होता है। यह भी कहा जा सकता है कि पौराणिक कथाएं प्रतीकात्मक होती हैं।

 
बच्चों को ‘विश्व बंधुत्व’ की शिक्षा  - डा. जगदीश गांधी

(1) विश्व में वास्तविक शांति की स्थापना के लिए बच्चे ही सबसे सशक्त माध्यम:-

 
धनतेरस | धनतेरस का पौराणिक महत्व - भारत-दर्शन संकलन

कार्तिक मास में त्रयोदशी का विशेष महत्व है, विशेषतः व्यापारियों और चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान के लिए यह दिन अति शुभ माना जाता है।

 
धनतेरस | पौराणिक लेख - भारत-दर्शन संकलन | Collections

कार्तिक मास में त्रयोदशी का विशेष महत्व है, विशेषत: व्यापारियों और चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान के लिए यह दिन अति शुभ माना जाता है।

 
आइए, 'तम' से जूझ जाएं संपादकीय - रोहित कुमार 'हैप्पी'

दीपमाला कह रही है, दीप सा युग-युग जलो।
घोरतम को पार कर, आलोक बन कर तुम जलो।।

विश्वभर में हम भारतवासी दीवाली का त्योहार मनाते हैं। दीप प्रज्जलित करने की हमारी परम्परा का अभिप्राय, 'तमसो मा ज्योर्तिगमय' से रहा है । अर्थात हम हर वर्ष प्रयास करते हैं कि हमारा अज्ञान रूपी अँधकार ज्ञान रूपी प्रकाश से दूर हो!

विदेश में बसे हुए हम भारतवासियों के लिए ऐसे त्योहार और अधिक महत्ता रखते है क्योंकि इन्हीं त्योहारों के माध्यम से हम अपनी नई पीढ़ी को अपनी साँस्कृतिक विरासत सौंपते हैं ।

भारत-दर्शन पिछले 17 वर्षो से 'हिन्दी भाषा' का नन्हा सा दीपक जलाए हुए है। इन वर्षो में इस दीपक ने सर्दी, गर्मी, वर्षा और सिरफिरी तेज हवाओं का सामना किया है।

विगत वर्षो में हमें आपका स्नेह मिला है और आपके स्नेह की शक्ति ने हमें किंचित भी विचलित नहीं होने दिया। आइए, एक बार फिर आप और हम मिलकर 'तम' से जूझ जाएं सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि सभी के लिए!

 

 

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