भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

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गांधीजी के जीवन के विशेष घटनाक्रम - महात्मा गांधी

(2 अक्तूबर, 1869 - 30 जनवरी, 1948)

 
गांधी जी के बारे में कुछ तथ्य - भारत-दर्शन संकलन | Collections

गांधी जी के बारे में कुछ तथ्य:

  • 12 जनवरी 1918 को गांधी द्वारा लिखे एक पत्र में रबीन्द्रनाथ टैगोर को ‘‘गुरुदेव'' संबोधित किया गया था।
  • टैगोर ने 12 अप्रैल 1919 को लिखे अपने एक पत्र में पहली बार गांधी को ‘महात्मा' संबोधित किया था।
  • पहली बार नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने रेडियो सिंगापुर से 6 जुलाई, 1944 को प्रसारित अपने भाषण में राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। वैसे ऐसा भी कहा जाता है कि नेताजी ने इससे पहले भी आजाद हिंद रेडियो रंगून से प्रसारित अपने एक संदेश में 4 जून 1944 को गांधीजी को "देश के पिता" कहकर संबोधित किया था।
  • गांधीजी के मृत्यु पर पंडित नेहरु जी ने रेडियो द्वारा राष्ट्र को संबोधित किया और कहा "राष्ट्रपिता अब नहीं रहे"।

 

 
समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक - डा. जगदीश गांधी

सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन का जन्मदिवस 5 सितम्बर के अवसर पर विशेष लेख

 
लालबहादुर शास्त्री - भारत-दर्शन संकलन | Collections

भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश के एक सामान्य निम्नवर्गीय परिवार में हुआ था। आपका वास्तविक नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था। शास्त्री जी के पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एक शिक्षक थे व बाद में उन्होंने भारत सरकार के राजस्व विभाग में क्लर्क के पद पर कार्य किया।

 
फीजी में हिंदी - विवेकानंद शर्मा

फीजी के पूर्व युवा तथा क्रीडा मंत्री, संसद सदस्य विवेकानंद शर्मा का हिंदी के प्रति गहरा लगाव था । फीजी में हिंदी के विकास के लिए वह निरंतर प्रयत्नशील रहे।

 
हिन्दी का स्थान - राहुल सांकृत्यायन | Rahul Sankrityayan

प्रान्तों में हिन्दी

 
न्यूज़ीलैंड की हिंदी पत्रकारिता | FAQ  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

न्यूज़ीलैंड हिंदी पत्रकारिता - बारम्बार पूछे  जाने वाले प्रश्न | FAQ 

 
स्वामी विवेकानन्द का विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में दिया गया भाषण - स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो (अमेरिका) में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में एक बेहद चर्चित भाषण दिया था। विवेकानंद का जब भी जि़क्र आता है उनके इस भाषण की चर्चा जरूर होती है। पढ़ें विवेकानंद का यह भाषण...

 
गाँधी राष्ट्र-पिता...? - रोहित कुमार 'हैप्पी'

कुछ समय से यह मुद्दा बड़ा चर्चा में है, 'गाँधी को राष्ट्रपिता की उपाधि किसने दी?

 
न्यूज़ीलैंड हिंदी पत्रकारिता -बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्न | NZ Hindi Journalism FAQ  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

न्यूज़ीलैंड हिंदी पत्रकारिता - बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्न | NZ Hindi Journalism FAQ

 
पांच पर्वों का प्रतीक है दीवाली - भारत-दर्शन संकलन

त्योहार या उत्सव हमारे सुख और हर्षोल्लास के प्रतीक है जो परिस्थिति के अनुसार अपने रंग-रुप और आकार में भिन्न होते हैं। त्योहार मनाने के विधि-विधान भी भिन्न हो सकते है किंतु इनका अभिप्राय आनंद प्राप्ति या किसी विशिष्ट आस्था का संरक्षण होता है। सभी त्योहारों से कोई न कोई पौराणिक कथा अवश्य जुड़ी हुई है और इन कथाओं का संबंध तर्क से न होकर अधिकतर आस्था से होता है। यह भी कहा जा सकता है कि पौराणिक कथाएं प्रतीकात्मक होती हैं।

 
ऐसे थे शरत बाबू  - भारत-दर्शन संकलन

बात उस समय की है जब सुप्रसिद्ध बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने लेखन अभी आरम्भ ही किया था। उन दिनो कई बार प्रकाशनार्थ भेजी गई उनकी रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं द्वारा लौटा दी जाती थीं या प्रकाशित होने पर भी उन्हें दूसरे लेखकों की तुलना में कम पारिश्रमिक मिलता था। इसी संकोच के कारण कई बार तो वह कहानी लिख कर प्रकाशनार्थ कहीं नहीं भेजते थे।

 
व्यौहार राजेन्द्र सिंहा  - भारत-दर्शन

व्यौहार राजेन्द्र सिंह / सिंहा (Beohar Rajendra Simha) का जन्म 14 सितंबर, 1900 को जबलपुर में हुआ था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्द दास के साथ व्यौहार राजेन्द्र सिंह ने काफी प्रयास किए। इसके चलते उन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएं भी कीं। व्यौहार राजेन्द्र सिंह हिंदी साहित्य सम्मलेन के अध्यक्ष रहे। आपने अमेरिका में आयोजित विश्व सर्वधर्म सम्मलेन में भारत का प्रतिनिधित्व किया जहां सर्वधर्म सभा में हिंदी में ही भाषण दिया जिसकी बहुत प्रशंसा हुई। संस्कृत, बांग्ला, मराठी, गुजराती, मलयालम, उर्दू, अंग्रेज़ी आदि पर आपका अच्छा अधिकार था।

 
भारत में शिक्षक दिवस | Teachers' Day in India - रोहित कुमार 'हैप्पी'

भारत में शिक्षक दिवस (Teachers' Day in India )   

 
डा अरून गाँधी से बातचीत - रोहित कुमार 'हैप्पी'

महात्मा गांधी के पौत्र डा अरून गाँधी से बातचीत

 
हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस दो अलग-अलग आयोजन हैं। दोनों का इतिहास और पृष्ठभूमि भी पृथक है।  आइए, हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। 

 
दीवाली पौराणिक कथाएं - भारत-दर्शन संकलन

नि:संदेह भारतीय व्रत एवं त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। हमारे सभी व्रत-त्योहार चाहे वह होली हो, रक्षा-बंधन हो, करवाचौथ का व्रत हो या दीवाली पर्व, कहीं न कहीं वे पौराणिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं और उनका वैज्ञानिक पक्ष भी नकारा नहीं जा सकता।

 
अटल जी का ऐतिहासिक भाषण  - भारत-दर्शन संकलन

स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का हिंदी प्रेम सर्वविदित है।

 
हिंदी वालों को अटल-पताका की डोर फिर थमा गया विश्व हिंदी सम्मेलन - प्रो.वीरेंद्र सिंह चौहान

तीन साल में एक बार आयोजित होने वाला हिंदी का वैश्विक मेला अर्थात विश्व हिंदी सम्मेलन बीते दिनों मॉरिशस के पाई में स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुआ। सम्मेलन से ठीक 2 दिन पहले जाने-माने हिंदी प्रेमी और जागतिक पटल पर हिंदी के सबसे प्रभावी ध्वज वाहकों में से एक पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का महाप्रयाण हो गया था। स्वाभाविक रुप से ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन पर कवि साहित्यकार, पत्रकार व राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की छाया प्रारंभ से अंत तक बनी रही। सम्मेलन से मेले और उल्लास का भाव तो अटल जी के परलोक गमन के चलते चला गया। मगर ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी को लेकर हिंदी वालों को उस डोर का छोर जरूर मिल गया जिसे थाम कर विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में प्रथम हिंदी संबोधन के साथ अटल जी ने विश्व गगन में हिंदी की गौरव ध्वजा फहरायी थी।

 
परदेश और अपने घर-आंगन में हिंदी - बृजेन्द्र श्रीवास्तव ‘उत्कर्ष’

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था, "भारत के युवक और युवतियां अंग्रेजी और दुनिया की दूसरी भाषाएँ खूब पढ़ें मगर मैं हरगिज यह नहीं चाहूंगा कि कोई भी हिन्दुस्तानी अपनी मातृभाषा को भूल जाएँ या उसकी उपेक्षा करे या उसे देखकर शरमाये अथवा यह महसूस करे कि अपनी मातृभाषा के जरिए वह ऊँचे से ऊँचा चिन्तन नहीं कर सकता।" वास्तव में आज उदार हृदय से, गांधी जी के इस विचार पर चिंतन-मनन करने की आवश्यकता है। हिंदी भाषा, कुछ व्यक्तियों के मन के भावों को व्यक्त करने का माध्यम ही नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सभ्यता, अस्मिता, एकता-अखंडता, प्रेम-स्नेह-भक्ति और भारतीय जनमानस को अभिव्यक्त करने की भाषा है। हिंदी भाषा के अनेक शब्द वस्तुबोधक, विचार बोधक तथा भावबोधक हैं ये शब्द संस्कृति के भौतिक, वैचारिक तथा दार्शनिक-आध्यात्मिक तत्वों का परिचय देते हैं । इसीलिए कहा गया है- "भारत की आत्मा को अगर जानना है तो हिंदी सीखना अनिवार्य है ।"

 

 

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