अहिंदी भाषा-भाषी प्रांतों के लोग भी सरलता से टूटी-फूटी हिंदी बोलकर अपना काम चला लेते हैं। - अनंतशयनम् आयंगार।

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लघुकथाएं

लघु-कथा, *गागर में सागर* भर देने वाली विधा है। लघुकथा एक साथ लघु भी है, और कथा भी। यह न लघुता को छोड़ सकती है, न कथा को ही। संकलित लघुकथाएं पढ़िए -हिंदी लघुकथाएँप्रेमचंद की लघु-कथाएं भी पढ़ें।

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वेश - खलील जिब्रान

एक दिन समुद्र के किनारे सौन्दर्य की देवी की भेंट कुरूपता की देवी से हुई। एक ने दूसरी से कहा, ‘‘आओ, समुद्र में स्नान करें।''

 
अर्जुन या एकलव्य  - रोहित कुमार हैप्पी

'अर्जुन और एकलव्य' की कहानी सुनाकर मास्टर जी ने बच्चों से पूछा, "तुम अर्जुन बनोगे या एकलव्य?"

 
ऊबड़खाबड़ रास्ता | लघुकथा - बैकुंठनाथ मेहरोत्रा

ऊबड़खाबड़ रास्ता। उस पर एक इंसान बढ़ता चला जा रहा था।

 
समाधान | लघुकथा - अज्ञात

एक बूढा व्यक्ति था। उसकी दो बेटियां थीं। उनमें से एक का विवाह एक कुम्हार से हुआ और दूसरी का एक किसान के साथ।

 
बछडू - मृणाल आशुतोष

"क्या हुआ? कल से देख रहा हूँ, बार-बार छत पर जाती हो।" विमल अनिता से पूछ बैठे।

"नहीं, ऐसा तो कुछ नहीं है।"

"कोई हमसे ज्यादा स्मार्ट आदमी आ गया है क्या, उधर?"

"बिना सोचे समझे ऊजूल-फ़िज़ूल मत बोला करो। नहीं तो अच्छा नहीं होगा। कहे देती हूँ।"

"अरे हम तो मज़ाक कर रहे थे। रानी साहिबा तो बुरा मान गयीं। क्या हुआ, बताओ न!"

" नहीं छोड़ो, जाने दो। तुम नहीं समझोगे।"

"अच्छा! ऐसा कौन-सा चीज़ है जो तुम समझती हो और हम नहीं समझ सकते।"

"बात मत बढ़ाओ। छोड़ दो कुछ देर के लिए अकेला हमको।"

"अब तुमको मेरी सौगंध है, बताना ही पड़ेगा।"

"तुमने सौगंध क्यों दे दिया?"

"बताओ न। मेरा जी घबरा रहा है अब।"

"गनेशिया ने अपना बछड़ू बेच दिया।"

"लो,इसमें परेशान होने की क्या बात है? बछड़ू को कब तक पाले बेचारा? बैल बना कर रखना तो था नहीं।"

"नहीं दिखा न तुम्हें! गाय का दर्द नहीं दिखा, न! जब से बछड़ू खुट्टा पर से गया है, गाय दो मिनट के लिये भी नहीं बैठी है।

उसकी आँखों में देखोगे तो हिम्मत जबाब दे देगा।"

"वह तो होता ही है। क्या किया जा सकता है?"

"अपने सौरभ को भी जर्मनी गये हुए पाँच साल हो गए। शादी से पहले प्रत्येक दिन फोन करता था। शादी के बाद हफ्ता, महीना होते-होते आज छह महीना हो गया, उसका फोन आये हुए।"

"उसका, इस बात से क्या मतलब है?"

"हमने भी तो बीस लाख और एक गाड़ी में अपने बछड़ू को...."

 
टंगटुट्टा - मृणाल आशुतोष

घर का माहौल थोड़ा असामान्य सा हो चला था। परसों ही राजेन्द्र ने किसी दुखियारी से शादी करने की बात घर पर छेड़ दी थी। छोटे भाइयों को तो आश्चर्य हुआ, पर बहुओं की आवाज़ कुछ ज्यादा ही तेज़ हो गई। बेचारी बूढ़ी माँ समझाने की कोशिश कर थककर हार मान चुकी थी।

 
क्रमशः प्रगति - शरद जोशी | Sharad Joshi

खरगोश का एक जोड़ा था, जिनके पाँच बच्चे थे।

 

 

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