मैं महाराष्ट्री हूँ, परंतु हिंदी के विषय में मुझे उतना ही अभिमान है जितना किसी हिंदी भाषी को हो सकता है। - माधवराव सप्रे।

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क्षणिकाएं

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पाँच क्षणिकाएँ  - नवल बीकानेरी

अर्थी के
अर्थ को
अगर मानव समझता
तो कदाचित्
अर्थ का
सामर्थ्य समझता।

 

 

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