देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

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दोहे  
दोहा मात्रिक अर्द्धसम छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11 मात्राएं होती हैं। इस प्रकार प्रत्येक दल में 24 मात्राएं होती हैं। दूसरे और चौथे चरण के अंत में लघु होना आवश्यक है। दोहा सर्वप्रिय छंद है।

कबीर, रहीम, बिहारी, उदयभानु हंस, डा मानव के दोहों का संकलन।

Literature Under This Category
 
कबीर दोहे -2  - कबीरदास | Kabirdas

(21)
लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट ।
पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट ॥

 
रहीम के दोहे  - रहीम

(1)

 
रहीम के दोहे - 2  - रहीम

(21)

 
राजगोपाल सिंह | दोहे  - राजगोपाल सिंह

बाबुल अब ना होएगी, बहन भाई में जंग
डोर तोड़ अनजान पथ, उड़कर चली पतंग

 
दोहे और सोरठे  - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र | Bharatendu Harishchandra

है इत लाल कपोल ब्रत कठिन प्रेम की चाल।
मुख सों आह न भाखिहैं निज सुख करो हलाल॥

 
दोहावली  - तुलसीदास | Tulsidas

तुलसीदास कृत 'दोहावली' मुक्तक रचना है। इसमें 573 छंद हैं जिनमें 23 सोरठे व शेष दोहे संगृहित हैं।

 
दोहावली - 1  - तुलसीदास | Tulsidas

श्रीसीतारामाभ्यां नम:

 
वृन्द के नीति-दोहे  - वृन्द

स्वारथ के सब ही सगे, बिन स्वारथ कोउ नाहिं ।
जैसे पंछी सरस तरु, निरस भये उड़ि जाहिं ।। १ ।।

 
निदा फ़ाज़ली के दोहे  - निदा फ़ाज़ली

बच्चा बोला देख कर मस्जिद आली-शान ।
अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान ।।

 
रामनरेश त्रिपाठी के नीति के दोहे  - रामनरेश त्रिपाठी

विद्या, साहस, धैर्य, बल, पटुता और चरित्र।
बुद्धिमान के ये छवौ, है स्वाभाविक मित्र ।।

 
कबीर के दोहे | Kabir's Couplets  - कबीरदास | Kabirdas

कबीर के दोहे सर्वाधिक प्रसिद्ध व लोकप्रिय हैं। हम कबीर के अधिक से अधिक दोहों को संकलित करने हेतु प्रयासरत हैं।

 
बिहारी के होली दोहे  - बिहारी | Bihari

होली पर बिहारी के कुछ दोहे

 
कबीर दोहे -3  - कबीरदास | Kabirdas

(41)
गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, का के लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपणे, गोबिंद दियो मिलाय॥

(42)
गुरु कीजिए जानि के, पानी पीजै छानि ।
बिना विचारे गुरु करे, परे चौरासी खानि॥

(43)
सतगुरू की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।
लोचन अनंत उघाडिया, अनंत दिखावणहार॥

(44)
गुरु किया है देह का, सतगुरु चीन्हा नाहिं ।
भवसागर के जाल में, फिर फिर गोता खाहि॥

(45)
शब्द गुरु का शब्द है, काया का गुरु काय।
भक्ति करै नित शब्द की, सत्गुरु यौं समुझाय॥

(46)
बलिहारी गुर आपणैं, द्यौंहाडी कै बार।
जिनि मानिष तैं देवता, करत न लागी बार।।

(47)
कबीरा ते नर अन्ध है, गुरु को कहते और ।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर ॥

(48)
जो गुरु ते भ्रम न मिटे, भ्रान्ति न जिसका जाय।
सो गुरु झूठा जानिये, त्यागत देर न लाय॥

(49)
यह तन विषय की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिये जो गुरु मिलै, तो भी सस्ता जान॥

(50)
गुरु लोभ शिष लालची, दोनों खेले दाँव।
दोनों बूड़े बापुरे, चढ़ि पाथर की नाँव॥


गुरू महिमा पर कबीर दोहे  (Kabir Dohe on Guru)

 
माँ पर दोहे | मातृ-दिवस  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

जब तक माँ सिर पै रही बेटा रहा जवान।
उठ साया जब तै गया, लगा बुढ़ापा आन॥

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कबीर दोहे -4  - कबीरदास | Kabirdas

समझाये समझे नहीं, पर के साथ बिकाय ।
मैं खींचत हूँ आपके, तू चला जमपुर जाए ॥ 51 ॥

 
होली व फाग के दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

भर दीजे गर हो सके, जीवन अंदर रंग।
वरना तो बेकार है, होली का हुड़दंग॥

 
कुछ दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

आँखों से रूकता नहीं बहता उनके नीर ।
अपनी-अपनी है पड़ी, कौन बँधाये धीर ।।

 
आज के दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

हमने चुप्पी तान ली, नहीं करेंगे जंग ।
फिर भी दुनिया ना हटे, करती रहती तंग ।। 

 
जीवन और संसार पर दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

आँखों से बहने लगी, गंगा-जमुना साथ ।
माँ ने पूछा हाल जो, सर पर रख कर हाथ ।।

 
गोपालदास नीरज के दोहे  - गोपालदास ‘नीरज’

(1)
कवियों की और चोर की गति है एक समान
दिल की चोरी कवि करे लूटे चोर मकान

 
रैदास के दोहे  - रैदास | Ravidas

जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।

 
दोहे | रसखान के दोहे  - रसखान | Raskhan

प्रेम प्रेम सब कोउ कहत, प्रेम न जानत कोइ।
जो जन जानै प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोइ॥

 
रोहित कुमार 'हैप्पी' के दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

रोहित कुमार 'हैप्पी' के दोहों का संकलन।

 
कबीर के कालजयी दोहे  - कबीरदास | Kabirdas

दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय
जो सुख में सुमिरन करें, दुख काहे को होय

 
बिहारी के दोहे | Bihari's Couplets  - बिहारी | Bihari

रीति काल के कवियों में बिहारी सर्वोपरि माने जाते हैं। सतसई बिहारी की प्रमुख रचना हैं। इसमें 713 दोहे हैं। बिहारी के दोहों के संबंध में किसी ने कहा हैः

सतसइया के दोहरा ज्यों नावक के तीर।
देखन में छोटे लगैं घाव करैं गम्भीर।।

 
सदुपदेश | दोहे  - गयाप्रसाद शुक्ल सनेही

बात सँभारे बोलिए, समुझि सुठाँव-कुठाँव ।
वातै हाथी पाइए, वातै हाथा-पाँव ॥१॥

 
हिंदी पर दोहे  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

बाहर से तो पीटते, सब हिंदी का ढोल।
अंतस में रखते नहीं, इसका कोई मोल ।।

 
डा रामनिवास मानव के दोहे  - डा रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav

डॉ. 'मानव' दोहा, बालकाव्य तथा लघुकथा विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं तथा विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। उनके कुछ दोहे यहां दिए जा रहे हैं:

 

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