कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।

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नया साल आया (बाल-साहित्य )    Print  
Author:जयप्रकाश मानस | Jaiprakash Manas
 

नया साल आया
स्वागत में मौसम ने
नया गीत गाया
डाल-डाल झुकी हुई
महक उठे फूल-फूल
पवन संग पत्ते भी
देखो रहे झूल झूल
ईर्ष्या को त्याग दें
सबको अनुराग दें
सुख-दुख में साथ रहें
हाथों में हाथ में दें
आओ नए साल में
गीत नया गाएं
दया प्रेम करुणा को
जी भर अपनाएं ।।

-जयप्रकाश मानस
[जयप्रकाश मानस की बाल कविताएं]

 

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