साहित्य का स्रोत जनता का जीवन है। - गणेशशंकर विद्यार्थी।

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ख़ुशामद | लघुकथा (कथा-कहानी)    Print  
Author:भारतेन्दु हरिश्चन्द्र | Bharatendu Harishchandra
 

एक नामुराद आशिक से किसी ने पूछा, 'कहो जी, तुम्हारी माशूक़ा तुम्हें क्यों नहीं मिली।'

बेचारा उदास होकर बोला, 'यार कुछ न पूछो! मैंने इतनी ख़ुशामद की कि उसने अपने को सचमुच ही परी समझ लिया और हम आदमियों से बोलने में भी परहेज़ किया।'

-भारतेंदु हरिश्चंद्र

 

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