हिंदुस्तान की भाषा हिंदी है और उसका दृश्यरूप या उसकी लिपि सर्वगुणकारी नागरी ही है। - गोपाललाल खत्री।

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डर (कथा-कहानी)  Click To download this content    
Author:स्वामी विवेकानंद

एक बार स्वामी जी दुर्गा जी के मंदिर से निकल रहे थे कि तभी बहुत-से बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वे उनके नज़दीक आने लगे और डराने लगे। स्वामी जी भयभीत हो गए और खुद को बचाने के लिए दौड़ कर भागने लगे, पर बन्दर तो मानो पीछे ही पड़ गए और वे उन्हें दौडाने लगे।

पास खड़े एक वृद्ध सन्यासी ये सब देख रहे थे। उन्होंने स्वामी जी को रोका और बोले, "रुको ! उनका सामना करो !"

स्वामी जी तुरन्त पलटे और बंदरों के तरफ बढ़ने लगे। ऐसा करते ही सभी बंदर भाग गए। इस घटना से स्वामी जी को एक गंभीर सीख मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक संबोधन में कहा, "यदि तुम कभी किसी चीज से भयभीत हो तो उससे भागो मत, पलटो और सामना करो।"

[ भारत-दर्शन संकलन]

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