वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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पथ से भटक गया था राम | भजन (काव्य)    Print  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'
 

पथ से भटक गया था राम
नादानी में हुआ ये काम
 
छोड़ गए सब संगी साथी
संकट में प्रभु तुम लो थाम
 
तू सबके दुःख हरने वाला
बिगड़े संवारे सबके काम
 
तेरा हर पल ध्यान धरुं मैं
ऐसा पिला दे प्रेम का जाम

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

[ 27-06-96]

 

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[उपरोक्त का दूसरा संस्करण]

पथ से भटक गया मैं राम
नादानी में हुआ ये काम।

छोड़ गए सब संगी साथी
संकट में प्रभु तुम लो थाम।

क्षमा करो हे प्रभु मुझे तुम
भूल गया था मैं तेरा नाम।

 
मन अपमानित तन पीड़ित है
याद करुं मैं तुझे हे शाम।

 
कष्ट हरो मेरे तन-मन के तुम
बिगड़े संवारों तुम सब काम।


- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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