देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

Find Us On:

English Hindi
Loading
बदलीं जो उनकी आँखें (काव्य)  Click To download this content    
Author:सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | Suryakant Tripathi 'Nirala'

बदलीं जो उनकी आँखें, इरादा बदल गया ।
गुल जैसे चमचमाया कि बुलबुल मसल गया ।

यह टहनी से हवा की छेड़छाड़ थी, मगर
खिलकर सुगन्ध से किसीका दिल बदल गया ।

ख़ामोश फ़तह पाने को रोका नहीं रुका
मुश्किल मुकाम, ज़िंदगी का जब सहल गया ।

मैंने कला की पाटी ली है शेर के लिए,
दुनियां के गोलन्दाजों को देखा, दहल गया ।

- निराला

Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश