कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।

Find Us On:

English Hindi
Loading
चाचा नेहरू | बाल कविता (बाल-साहित्य )    Print  
Author:डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'
 

वह मोती का लाल जवाहर,

‍‌अपने युग का वह नरनाहर ।

भोली भाली मुस्कानों पर,

करता था सर्वस्व निछावर ।

 

वह बच्चों का प्यारा चाचा,

उनका हित सोचा करता था ।

बड़े चाव से बच्चों के संग,

बच्चा बन खेला करता था ।


सौंप दिया नन्हें बच्चों को,

अपना जन्म दिवस भी उसने ।

प्यार दिखाने को बच्चों को,

युक्त ख़ूब यह सोची उसने ।

 

-डा राणा प्रताप सिंह 'राणा'

[मीठे बोल]

 

Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
  Captcha