अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

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उसे कुछ मिला, नहीं ! (काव्य)    Print  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड
 

कूड़े के ढेर से

कुछ चुनते हुए बच्चे को देख

एक चित्रकार ने

करूणामय चित्र बना डाला।


कवि ने

एक मार्मिक रचना

रच डाली ।


एक कहानीकार ने

'उसी बच्चे' पर

कालजयी

कहानी कही ।


जनता ने

प्रदर्शनी में चित्र,

मंच पर कविता,

और

पत्रिका में छपी

कहानी को ख़ूब सराहा ।


पर उस बच्चे ने चित्र, कविता और कहानी से क्या पाया?


वो अब भी लगा है...

वहीं कूड़े के ढेर से कुछ खोजने में ।


उसे कुछ मिला, नहीं !!!

-  रोहित कुमार 'हैप्पी'

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